इस गाँव में जो तालिबे ईमान हो गए ,
मुखिया की नज़र में वो बेईमान हो गए |
लाठी ही अब कानून है लाठी ही न्याय है ,
लाठी के मालिक गाँव के प्रधान हो गए |
धोखा ,फरेब,झूठ , बेईमानी,छल , कपट
पर्याय बुद्धिमानी के तमाम हो गए |
जो भी कोई बोलेगा सच वो सज़ा पायेगा ,
जारी यहाँ पे ऐसे कुछ फरमान हो गए |
हालात कुछ इस तरह से बदले की ,
शैतान एक रात में इंसान हो गए |
बस्ती में मेरी इस तरह फैला समाजवाद,
रहजन हों या रहबर सब समान हो गए |
रावन की जीत अब राम पे अब लिखी जाएगी ,
बिकने को राजी तुलसी यहाँ तमाम हो गए |
रोये हिरन जंगल में अब बच पाएगा कैसे ,
जब भेदियों के राज के ऐलान हो गए |
Labels: बुद्धिमानी के पर्याय

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