Sunday, February 7, 2010

इस गाँव में जो तालिबे ईमान हो गए ,
मुखिया की नज़र में वो बेईमान हो गए |

लाठी ही अब कानून है लाठी ही न्याय है ,
लाठी के मालिक गाँव के प्रधान हो गए |

धोखा ,फरेब,झूठ , बेईमानी,छल , कपट
पर्याय बुद्धिमानी के तमाम हो गए |

जो भी कोई बोलेगा सच वो सज़ा पायेगा ,
जारी यहाँ पे ऐसे कुछ फरमान हो गए |

हालात कुछ इस तरह से बदले की ,
शैतान एक रात में इंसान हो गए |

बस्ती में मेरी इस तरह फैला समाजवाद,
रहजन हों या रहबर सब समान हो गए |

रावन की जीत अब राम पे अब लिखी जाएगी ,
बिकने को राजी तुलसी यहाँ तमाम हो गए |

रोये हिरन जंगल में अब बच पाएगा कैसे ,
जब भेदियों के राज के ऐलान हो गए |

Labels: